Saturday, 6 January 2018

शायरी

दर्द जितना सहा जाये उतना ही सहना
किसी के दिल को बात लग जाये वो बात न कहना
 मिलते हैं तुम्हारे जैसे लोग बहुत कम
इसलिए हमें  कभी अलविदा ना कहना।

अगर आपको रात की तनहाइयों मैं कोई तंग करे
आपको करवटें बदलने को मजबूर करे
या कण मैं सरगोशी करे
तो कछुआ जलाओ मच्छर भगाओ

आप खूबसूरत हैं इतने कि हर शख्स की जुवान पर आप ही का तराना है
हम नाचीज तो कहाँ किसके काबिल और आपका तो खुदा भी दीवाना है 

Tuesday, 2 January 2018

ghar ujadne vale

फूल खिले थे घर घर कितने 
उजाड़ गई है क्यारी क्यारी 
अपना आंगन सजा न पाए 
गुलदानों  मैं सजाने की 

Monday, 18 December 2017

vyaapari chor nahin

आज  बीजेपी जीत तो गई क्योंकि  जनता  के पास विकल्प नहीं हैं  और स्वयं मोदीजी बहुत भले और विकास पुरुष कहना चाहिए हैं पर  यह जीत निराशजनक है हम मोदीजी को गद्दी पर देखना चाहते हैं क्योंकि  देश उनके हाथों मैं सुरक्षित है कम से कम पैसे के लिए बिकेगा नहीं प विकास भी  चाहते हैं पर कम  से कम जनता को अधिक परेशान करके नहीं  ा माध्यम वर्ग का व्यापारी  छोटा मोटा चोर है आम व्यपारी  बस रोटी ही अच्छे से खा पता है दिन रात करके इतना तो हुक बनता है  उसके ही दम पर सरकारी कर्मचारी मलाई खा रहे हैं उसे  ही सर्वाधिक परेशान किया जाता है
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तो लड़ी जा रही पर इसके मुख्या अपराधी कौन है अच्छी तरह सब जानते है  नोटबंदी  किस वजह से विफल हुई इसका मुख्या कारणक्या था कहने की आवश्यकता नहीं है इसीप्रकार  व्यापारी वर्ग को इतना परेशान किया जाता है की कहा नहीं जा सकता सही ईमानदार से भी वसूली के बिना कागज़ नहीं बढ़ाये जाते हैं बिना मेहनतवह मौज मरते हैं  सारा दिन मेहनत  करके व्यापारी अच्छे से रोटी खाने का हकदार तो है  फिर  लगाम व्यापारी के ऊपर ही क्यों लगाती है 

Wednesday, 13 December 2017

भारत इंडिया हो गया


बदलाब की बयार हर तरफ है  इन्सान की प्रकृति ही नहीं बदल रही है सब कुछ बदल रहा है। डॉ राधाकृष्णन ने कहा था  आवश्यक नहीं जिस उद्देश्य के साथ शताब्दियों पहले कोई कार्य शुरू किया गया है वह आज भी सार्थक हो समय के साथ आवश्यकताएं बदलती हैं अब  अगर ब्रह्माण्ड भी अपनी चाल बदल रहा है तो उसका क्या दोष टेनीसन ने कहा है परिवर्तन संसार का नियम है परिवर्तन का कोई उद्देश्य तो होता है सब कुछ नियमबद्ध है तो हमारे उद्देश्य भीतो किसी नियम के अंतर्गत होंगे लेकिन इस समय हम उदेश्यहीन है।  भारत का भारत अब कहीं नहीं अब पूरब का सूर्य पश्चिम से निकल रहा है  और पश्चिम की उदासी भरी डूबते सूर्य की हिंसक प्रवर्ती उग रही है भोरे की शीतलता डूब रही है तब ही हर तरफ पश्चिम का अनुसरण कर रहे हैं जहाँ बस चलते जाना है कहाँ किसके लिए कुछ नहीं पता उद्देश्य ही बिखराव लता है एक सूत्र मैं नहीं बंधता डोर कमजोर होती है टूट टूट कर तुकडे बिखरी रहती है भारतीय संस्कृति मैं परिवार समाज प्रमुख था उसके सामने उद्देश्य था अपने को अपने बच्चों के सामने स्थापित करना एक उदाहरण पेश करना जिससे उनके अपने बच्चे सीखें और एक सुसंस्कृत परिवार सामने आये लेकिन परिवार के साथ साथ मर्यादाये टूटी लिप्साएं बढ़ी लोलुपता बढ़ी राजनीती बदली उसके उद्देश्य बदले तो सब कुछ बदल गया तभी तो भारत इण्डिया  हो गया 

Friday, 6 October 2017

hath bandhe Kyoon khade ho

gkFk cka/ks D;w¡ [kM+s gks gknlksa ds lkeus
              gknls dqN Hkh ugh gSa fgEerksa ds lkeus

fdldh etky gS dksbZ NsM+s fnysj dks
dqÙks Hkh ?ksj ysrs gSa xfnZ”k esa “ksj dks

              Qyad dks ftn gS tgk¡ fctfy;k¡ fxjkus dh
              ge Hkh reUuk j[krs gSa ogha vkf”k;k¡ cukus dh

vxj QqlZr feys ikuh dh rgjhjksa dks i<+ ysuk
gj bd nfj;k gtkjksa lky vQlkuk lk fy[krk gS

              dksf”k”k Hkh dj mEehn Hkh j[k jkLrk Hkh pqu
              fQj mlds ckn FkksM+k eqdn~nj ryk”k dj

cPpksa ds NksVs gkFkksa dks pk¡n flrkjs Nwus nks
pkj fdrkcsa i<+dj ;g Hkh ge tSls gks tk;sxsa
lHkh pkj fnu dh pk¡nuh ;s fj;klrsa ;s frtkjrsa
eq>s ml Qdhj dh “kku ns fd tekuk mldh felky ns

              bd iyM+s esa I;kj j[k nwts esa lalkj
              rksys gh ls tkfu;s fdl esa fdruk Hkkj

;w¡ gh gksrk gS oks [kwch tks gS ge ls e”kgwj
mlds gksus esa ugh gksrk bjknk viuk

              dHkh eSa viuh gkFkksa dh ydhjksa ls ugh my>k
              eq>s ekyqe gS fdLer dk fy[kk Hkh cnyrk gS

 t:jr ls T;knk vc fn[kkbZ ns jgk gS
vc eq>s lwjt mxkuk gh iM+sxkA

              gj vkneh esa gksrsa gSa nl chl vkneh
              ftldks Hkh ns[kuk gks dbZ ckj ns[kuk

l ls l rd lkr lqj lkr lqjksa esa jkx
mruk gh laxhr gS ftruh rq>esa vkx

              ekSr us tc ftUnxh dks ys fy;k vkxks”k esa
              Qklys nksuksa tgk¡ ds fdl dnj de gks x;s


Monday, 17 April 2017

किसी गेडे को फासेंगे

dq:{ks= esa Hkkjrh; fgUnh ifj"kn~ ds vf/kos”ku esa jl fl}kUr ij fopkj foe”kZ gks jgk FkkA MkŒ uxsUnz dh vkykspuk djrs gq, ,d Hkkjh Hkjde “kjhj okys vkykspd us dgk] Þ,slk yxrk gS u;h dfork ,d gfj.k “kkod gS vkSj uxsUnz th jl fl}kUr dk tky fcNkdj mls Qk¡lus ds fy;s izrh{kk dj jgs gSA *
       rHkh MkŒ uxsUnz cksy iM+s ]^vjs Qk¡luk gksxk rks fdlh xSMs dks Qk¡lsxs gfj.k “kkod dks D;ksa\* QCrh vkykspd ds “kjhj ij FkhA chp esa dksbZ cksy mBk] Þmlds fy;s [kkbZ [kksnuh gksxh MkŒ lkgcA lHkk Hkou gkL; vkSj Bgkdksa ls xwat x;kA





x;k izlkn “kqDy lusgh th Hkax ds cgqr “kkSdhu FksA ,d ckj Q:[kkckn x;s gq, FksA ogk¡ ,d dfo lEesyu Fkk yksx vkxzg djds ogk¡ ys x;sA ml fnu jkst ls dqN vf/kd Nu xbZ FkhA ml lEesyu esa leL;k nh xbZ Fkh fofp= fp=dkjh gSA
       lusgh th Hkax dh rjax esa vk¡[ks can fd;s gq, cSBs FksA yksxksa us le>k fd os bl le; leL;k iwfrZ dj jgs gSa  mudh ckjh vkbZ mUgksaesa Nan i<+k ftlesa jkf= dk :id gS&
              dkyh dkyh dTty dqekjh jkf= lh dq:ie;h
              ltuh pqM+Sy dh lh fof/k us lokjh gS
                     QS”ku u cw>k dSlk lw>k dq<+x <ax
              dkys jax okyh dks m<+k;h uhyh lkM+h gSA
                     tM+as gSa flrkjs dSls QwgM+ius ls ns[kks
              feÍh dj fn;k lkjk dke tjrkjh gS
                     csy gS u cwVk tgk¡ ns[kks ogha Øe VwVk
              csodwQ fof/k dh fofp= fp=dkjh gSA


Sunday, 19 February 2017

महर्षि दयानंद

 महर्षि दयानन्द

भारत भूमि पर महर्षि दयानन्द एक ऐसे ज्वाजल्यमान नक्षत्र हैं जिसके प्रकाश ने भारत भूमि को अंधेरे गर्त से निकालकर प्रकाशित किया है। युगों युगों में ऐसा सूर्य उत्पन्न होता है जिसका प्रकाश हर युग के अंधेरे मिटाता है।
कभी भारत भूमि ज्ञान का अथाह भंडार थी । वेद पुराण उपनिषद् में जीवन के सभी तत्व समाहित है जिस भारत में गौतम कपिल कणा व्यास, जैमिनि पतंजलि जैसे दर्शनशास्त्र प्रणेता, महर्षि शिवि ,कर्ण, दधीचि हरिश्चन्द जैसे दानी, द्रोण, भीष्म, भीमार्जुन सदृश बलशाली युधिष्ठर सदश धर्मात्मा सती, सीता, सावित्री, सुलोचना सदृशी पतिव्रत परायण अंजना तथा काली, कराली-दुर्ग और चण्डी जैसी वीरांगनाऐं हो चुकी। जहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम जैसे राजा, सोलह कलाओं के केन्द्र रहे श्री कृष्ण जन्म ले चुके हैं। ऐसी भारत भूमि को ऋषि मुनियों ने शत शत नमन किया है।
गायन्ति देवाः किल गीतकानि
धन्यस्त्वहो भारत भूमि भागः।
जिस की प्रशंसा में देवता भी गीत गाते है। वह भारत भूमि धन्य है कहा जाता है एक बार शंकाराचार्य मंडनमिश्र से शास्त्रार्थ करने उनके नगर पहुंचे। उन्हें एक कुँए पर पनहारिने पानी भरती दिखाई दी उन्होंने उनसे मंडनमिश्र के घर का पता पूछा तो पनहारिनों ने उत्तर दिया
स्वतः प्रमाण परतः प्रमाणम्
       कीराडना यत्र गिरो गिरन्ति
       द्वारेषु नीडान्तरसन्निरूद्धाः
        अवेहि तन् मण्डनमिश्रधाम
अर्थात् जिस घर के द्वार पर पिंजरे में बैठे पक्षी वेद स्वतः प्रमाण है या परतः प्रमाण है इस बात पर शास्त्रार्थ कर रहे है। बस समझ लेना कि यही मण्डनमिश्र का घर है
ऐसी भूमि जब चारों ओर से शास्त्रों की अवहेलना और कर्मकाण्डों से घिर घोर अंधेरे गर्त में जा रही थी अज्ञानता और सामाजिक दुरवस्था से आहत महर्षि दयानन्द ने वैदिक धर्म की पुर्नस्थापना वैदिक कर्मकाण्ड के प्रचार का बीड़ा उठाया । उनका कहना था वेद शास्त्रादि के अप्रचार के कारण जो अन्धकारमय युग में विधर्मियों ,नास्तिकों एवम् वाम मार्गियों ने अंहिसा के प्रतीक यज्ञादि को अज्ञानता के कारण दूषित और कलंकित किया है उसे उचित मार्ग दिखाने के लिये आर्य समाज की स्थापना की।
पंडितों ने अपने लाभार्थ वेद मंत्रों के अपने ढंग से अर्थ निकाल लिये थे और यजमानों को अनेक कर्मकाण्डों में लिप्त कर दिया था । अनेकों देवी देवताओं के चक्कर में भारतवासियों को फंसा दिया था। अनेक मत खड़े हो गये थे । विभिन्न विचारों के अलग अलग मत बन गये थे । शैव वैष्णब, जैन, बौद्ध तो एक दूसरे     की जान के दुश्मन बन गये थे । ऐसे समय में महर्षि दयानन्द देवदूत के समान आये और  पंडितों    और     धर्माबलंबियों के चक्कर से देशवासियों को निकालने का प्रयास किया इसके लिये नगर नगर शहर शहर जाकर प्रवचन दिये और शास्त्रार्थ किये ,जागृति फैलाई। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों के मिटाया अस्पृश्यता छुआछूत जैसे कोढ़ का विरोध किया । देश प्रेम की भावना जगाकर स्वतंत्रता की अलाख जगाई। देश की सुप्त आत्मा को जगाकर एक महान उद्धारक के रूप में देश को झिझोड़ डाला था।







Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...